Friday 16 April 2010

प्रेम से ही अस्तित्व है

   हम सभी शायद प्रेम को परिभाषित करने की नाकाम कोशिशे करते आये है, वैसे तो में भी एक निर्दोष सी कोशिश कर रहा हूँ पर कारन सिर्फ यही है की में खोज में हूँ और जो अब तक पता लगा है वो ये है की प्रेम एक ऐसा अनुभव है जो की खोजी को ही प्राप्त हो सकता है सिर्फ खोज में बने रहना ही प्रेम को पाने का एक मात्र जरिया है .

     प्रेम अस्तित्व है ये सारा विस्तार सिर्फ प्रेम का ही विस्तार है, क्योकि गहरे अर्थों में कहे तो ये ही कह सकते है की  जब प्रेम अपनी सारी सीमाए तोड़कर ब्रमांड में विस्तृत हो जाता है तो वह परमात्मा हो जाता है यही परमात्मा फिर सारी कायनात का रचियता हो कर सामने दिखाई पड़ता है.

    ओशो कहते है की परमात्मा कहीं और नहीं है ये हमारे अपने अंदर मौजूद है पर सिर्फ इसे समझ पाना ही इसे पाना है , परमात्मा एक गहरा अनुभव है जो इस भौतिक देह में अभोतिक को समझने का नाम है.

    परमात्मा अद्द्वत की वह स्तिथि है जब आप है तो परमात्मा मौजूद नहीं हो सकता; और जब परमात्मा होगा तो आप मौजूद नहीं हो सकते .

   सीधे शब्दों में कहें तो यही सत्य हो सकता है की परमात्मा प्रेम का ही विस्तार है, अब सबाल ये   है  की हमने दुनियां इस  तरह की बना ली है जिसमे प्रेम शब्द का तो वेझिजक इस्तेमाल किया जाता है पर पर प्रेम कहीं दिखाई नहीं पड़ता बात तो कृष्ण की ही की जाती है पर वर्तमान में राधा के वजूद पर अब भी शक किया जाता है.
  हाल ही के मामले में हरियाणा में एक प्रेमी युगल को मौत के घाट उतार दिया जाता है और नाम में धर्म का, संस्क्रति का सहारा लिया जाता है .

 हम यदि परमात्मा को पाने के लिए जब अंतर्मन में झाकने में असमर्थ पाते है तो उसी परमात्मा के नाम पर बहुत से मंदिर मस्जिदों का निर्माण कर अपने आप को महान कहकर अपने अहंकार की भूख मिटा लेते है.

प्रेम अपने सभी अर्थों में , सभी स्वरुप में विशिष्ट है जब तक इस दुनिया में इसका    पूर्ण रूप से अंगीकार  नहीं होता परमात्मा , दया , करुना , धर्म आदि की बात करना पाखंड से ज्यादा कुछ नहीं क्योंकि सिर्फ प्रेम ही परमात्मा तक पहुँचने का एकमात्र रास्ता है , माना चाहे कुछ भी जाये सिर्फ प्रेम का एक ही प्रकार होता है स्वरुप चाहे जो भी हो.

4 comments:

uthojago said...

really great, you basic concept is clear so your future is bright

ई-गुरु राजीव said...

हिन्दी ब्लॉगजगत के स्नेही परिवार में इस नये ब्लॉग का और आपका मैं ई-गुरु राजीव हार्दिक स्वागत करता हूँ.

मेरी इच्छा है कि आपका यह ब्लॉग सफलता की नई-नई ऊँचाइयों को छुए. यह ब्लॉग प्रेरणादायी और लोकप्रिय बने.

यदि कोई सहायता चाहिए तो खुलकर पूछें यहाँ सभी आपकी सहायता के लिए तैयार हैं.

शुभकामनाएं !


"टेक टब" - ( आओ सीखें ब्लॉग बनाना, सजाना और ब्लॉग से कमाना )

ई-गुरु राजीव said...

आपका लेख पढ़कर हम और अन्य ब्लॉगर्स बार-बार तारीफ़ करना चाहेंगे पर ये वर्ड वेरिफिकेशन (Word Verification) बीच में दीवार बन जाता है.
आप यदि इसे कृपा करके हटा दें, तो हमारे लिए आपकी तारीफ़ करना आसान हो जायेगा.
इसके लिए आप अपने ब्लॉग के डैशबोर्ड (dashboard) में जाएँ, फ़िर settings, फ़िर comments, फ़िर { Show word verification for comments? } नीचे से तीसरा प्रश्न है ,
उसमें 'yes' पर tick है, उसे आप 'no' कर दें और नीचे का लाल बटन 'save settings' क्लिक कर दें. बस काम हो गया.
आप भी न, एकदम्मे स्मार्ट हो.
और भी खेल-तमाशे सीखें सिर्फ़ "टेक टब" (Tek Tub) पर.
यदि फ़िर भी कोई समस्या हो तो यह लेख देखें -


वर्ड वेरिफिकेशन क्या है और कैसे हटायें ?

संगीता पुरी said...

इस नए चिट्ठे के साथ हिंदी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!